महात्मा गाँधी जी कहते थे – “मेरी मातृभाषा में कितनी ही खामियाँ क्यों न हो, मैं उससे उसी तरह चिपका रहूँगा जिस तरह बच्चा अपनी माँ की छाती से। वही मुझे जीवनदायनी दूध दे सकती है। मैं अंग्रेजी को भी उसी तरह प्यार करता हूँ लेकिन जगह को हड़पना चाहती है जिसकी वह हकदार नहीं, तो मैं उससे सख्त नफरत करूँगा। —
अनल कुमार (Anal Kumar), केन्द्रीय विद्यालय क्रमांक-1, पटियाला
महात्मा गाँधी जी कहते थे – “मेरी मातृभाषा में कितनी ही खामियाँ क्यों न हो, मैं उससे उसी तरह चिपका रहूँगा जिस तरह बच्चा अपनी माँ की छाती से। वही मुझे जीवनदायनी दूध दे सकती है। मैं अंग्रेजी को भी उसी तरह प्यार करता हूँ लेकिन जगह को हड़पना चाहती है जिसकी वह हकदार नहीं, तो मैं उससे सख्त नफरत करूँगा। —
अनल कुमार (Anal Kumar), केन्द्रीय विद्यालय क्रमांक-1, पटियाला